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Mrs. Movie

  जैसा मानव कौल ने किसी इंटरव्यू में कहा था कि जो वस्तु हमें प्राप्त नहीं होती, उसके लिए हम भीतर से तैयार भी नहीं होते। यह पंक्ति केवल एक साधारण कथन नहीं, बल्कि मनुष्य की सम्पूर्ण जिजीविषा और आकांक्षाओं का दर्पण है। यह वही अदृश्य धागा है जो हमारे स्वप्नों को यथार्थ से जोड़ता है और कई बार हमें स्वयं के अंतराल में उतरने को बाध्य करता है। मानव कौल की यह पंक्ति केवल शब्द नहीं बल्कि जीवन के गर्भ में छुपा वह बीज है, जो समस्त असफलताओं और अधूरी आकांक्षाओं की जड़ को उधेड़ देता है। जो कुछ हमें नहीं प्राप्त होता, वह इसलिए नहीं कि ईश्वर ने हमें ठुकरा दिया, बल्कि इसलिए कि हमारे भीतर उसकी पात्रता अभी नहीं जन्मी। यह सरल सत्य मनुष्य की आत्मा को उसी क्षण जाग्रत कर सकता है, जब वह अपनी दुर्भाग्य की कड़वी शिकायतों को छोड़ कर अपने भीतर की अधूरी तैयारी को देखना प्रारम्भ करता है। ऋग्वेद कहता है कि आत्मा अनंत है पर उसका विस्तार तभी होता है जब साधक अपनी सीमाओं को पहचान कर उनका अतिक्रमण करता है। स्वप्न केवल कल्पना नहीं है, वह आत्मा की आवाज है। पर वह आवाज जब तक कर्म से नहीं जुड़ती तब तक केवल गूँज बन कर रह जा...